बदहाल सिम्स, मरीजों की जान पर मंडरा रहा खतरा
बिलासपुर। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सिम्स की व्यवस्थाएं लगातार कमजोर होती नजर आ रही हैं। इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचने वाले मरीजों को यहां अव्यवस्था, लापरवाही और संसाधनों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि मरीजों और उनके परिजनों में अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है।
अस्पताल की ओपीडी में रोजाना हजारों मरीज पहुंचते हैं, लेकिन डॉक्टरों की कमी और भारी भीड़ के कारण घंटों इंतजार करना पड़ता है। कई मामलों में समय पर जांच और उपचार नहीं मिलने की शिकायतें सामने आती रहती हैं। गंभीर मरीजों के लिए यह देरी खतरनाक साबित हो सकती है।
वार्डों में क्षमता से अधिक मरीजों का दबाव बना हुआ है। कई विभागों में बुनियादी सुविधाओं की कमी महसूस की जा रही है। मरीजों का कहना है कि इलाज से ज्यादा समय व्यवस्था से जूझने में निकल जाता है। अस्पताल परिसर में साफ-सफाई और रखरखाव की स्थिति भी अपेक्षा के अनुरूप नहीं है।
दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। उन्हें विभागों की जानकारी, जांच प्रक्रिया और उपचार संबंधी व्यवस्थाओं के लिए भटकना पड़ता है। कई बार मरीजों के परिजन मदद के लिए इधर-उधर चक्कर लगाते दिखाई देते हैं।
सिम्स पर पूरे संभाग के लाखों लोगों की स्वास्थ्य जिम्मेदारी है, लेकिन मौजूदा हालात में अस्पताल की व्यवस्था मरीजों को सुरक्षित और सुगम उपचार उपलब्ध कराने में कमजोर पड़ती दिख रही है। यदि व्यवस्थाओं में जल्द सुधार नहीं हुआ तो मरीजों की परेशानियां और बढ़ सकती हैं।
*: मरीजों की शिकायतें
इलाज के लिए घंटों इंतजार
जांच और रिपोर्ट में देरी
वार्डों में अत्यधिक भीड़
जानकारी के अभाव में भटकते मरीज
साफ-सफाई और रखरखाव की समस्या
